क्या सोमवार को गाड़ी खरीदनी चाहिए?

हाँ। वाहन खरीद के लिए सोमवार उन चार शुभ वारों में है जिनमें बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार भी हैं, क्योंकि यह चंद्रमा का दिन है। मंगलवार और शनिवार से बचना चाहिए। पर सोमवार को बिगाड़ने वाली चीज़ उस दिन का नक्षत्र और तिथि है।

VEVidhata Editorial Desk· Parashari Jyotish, Muhurta, KP, Lal Kitab, dasha and transit analysis
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समीक्षक Vidhata Editorial Desk · अद्यतन

इस लेख में
  1. चंद्रमा के कारण सोमवार वाहन के लिए अनुकूल क्यों है
  2. सोमवार फिर भी कब बिगड़ जाता है
  3. हर सोमवार एक जैसा क्यों नहीं होता
  4. दो सोमवारों में से चुनना हो तो
  5. खरीदना और डिलीवरी लेना, दो अलग प्रश्न हैं
  6. आपकी अपनी कुंडली कहाँ आती है

हाँ, सोमवार को गाड़ी खरीदी जा सकती है, और वाहन मुहूर्त में सोमवार उन चार दिनों में गिना जाता है जो खरीद के लिए शुभ माने गए हैं। बाकी तीन हैं बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार। सोमवार चंद्रमा का दिन है, और चंद्र का दिन ऐसी खरीद के लिए उपयुक्त रहता है जिसे घर में सहज रूप से स्वीकार होना है। वाहन के लिए जिन दो दिनों से बचना कहा गया है वे मंगलवार और शनिवार हैं। रविवार न शुभ सूची में है न वर्जित सूची में, इसलिए वह चल जाता है पर पसंदीदा नहीं है।

यह छोटा उत्तर है। लंबा उत्तर वही है जो आपको खराब सोमवार से बचाता है, क्योंकि वार पंचांग के पाँच अंगों में से केवल एक है, और सबसे भारी अंग वह नहीं है।

चंद्रमा के कारण सोमवार वाहन के लिए अनुकूल क्यों है

चंद्रमा मन, सुख, गृहस्थी और कोमल गति का कारक है। गाड़ी जितनी मशीन है उतनी ही घर की वस्तु भी है। उसमें परिवार बैठता है, वह घर के सामने खड़ी रहती है, और पहले दिन उसके बारे में जो भाव बनता है वही प्रायः बना रहता है। ऐसी वस्तु के लिए चंद्र का दिन ठीक बैठता है।

जिन दो दिनों को टालने को कहा गया है, उनमें यही तर्क उल्टा चलता है। मंगलवार मंगल का दिन है, जो दुर्घटना, चोट और विवाद का कारक है, और तेज़ चलने वाली मशीन पर यह छाप सबसे अनचाही है। शनिवार शनि का दिन है, जो देरी, घिसाव और रुक जाने का कारक है। यह दिन के प्रति कोई अंधविश्वास नहीं है। बात इतनी है कि पहला कर्म किस गुण के साथ शुरू हो रहा है।

सोमवार फिर भी कब बिगड़ जाता है

यही हिस्सा अधिकतर पन्ने छोड़ देते हैं। विधाता के वाहन मुहूर्त में जो गणना चलती है, उसमें शुभ वार का लाभ सीमित रहता है, जबकि अशुभ नक्षत्र का दोष उससे लगभग चार गुना भारी पड़ता है। इसलिए सोमवार का अंक गिर भी सकता है, और अकसर गिरता है।

वाहन खरीद के लिए सोमवार इन स्थितियों में बिगड़ जाता है।

  • चंद्रमा भरणी, कृत्तिका, आश्लेषा, मघा या मूल में हो। मूल का अर्थ ही जड़ है, जो चलने वाली वस्तु के लिए अच्छा संकेत नहीं है, और कृत्तिका काटने वाला नक्षत्र है। इन पाँच को सीधे छोड़ देना चाहिए।
  • तिथि चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी या अमावस्या हो। रिक्ता तिथियाँ यानी चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी दोनों पक्षों में त्याज्य हैं, केवल कृष्ण पक्ष में नहीं।
  • विष्टि करण हो, जिसे भद्रा कहते हैं। यह अकेले ही अच्छे दिन को काट देता है।
  • कृष्ण पक्ष हो। यह निषेध नहीं, हल्का दोष है, पर दो बराबर के सोमवारों में शुक्ल पक्ष वाला जीतेगा।

जिस सोमवार को आश्लेषा और चतुर्दशी दोनों हों, वह गाड़ी खरीदने का अच्छा दिन नहीं है। वह खराब दिन है जो संयोग से सोमवार पड़ गया।

हर सोमवार एक जैसा क्यों नहीं होता

चंद्रमा सबसे तेज़ चलने वाला ग्रह है। वह लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार करता है और पूरा चक्र करीब 27.3 दिन में पूरा करता है। वार सात दिन में लौटता है, नक्षत्र चक्र 27.3 दिन का है, और तिथि चक्र लगभग 29.5 दिन का। ये तीनों संख्याएँ कभी ठीक से नहीं मिलतीं, इसलिए इस सोमवार का पंचांग और अगले सोमवार का पंचांग लगभग अलग होते हैं।

यही ईमानदार कारण है कि कोई आपसे केवल इतना कहकर नहीं रुक सकता कि सोमवार शुभ है। वार का स्वामी स्थिर है। उसके ऊपर बैठने वाला सब कुछ चलता रहता है।

दो सोमवारों में से चुनना हो तो

इसी क्रम से चलिए और जहाँ निर्णय हो जाए वहीं रुक जाइए।

पहले नक्षत्र देखिए। वह सोमवार लीजिए जिस पर अश्विनी, पुष्य, हस्त, चित्रा, अनुराधा, श्रवण, रेवती, उत्तरा फाल्गुनी या उत्तराषाढ़ा पड़ रहा हो। इनमें वाहन के लिए अश्विनी सबसे ऊपर है, क्योंकि वह अश्व का नक्षत्र है और अश्व ही वाहन का पुराना प्रतीक है। पुष्य उसके ठीक बाद आता है और लगभग हर खरीद के लिए शुभ माना जाता है।

फिर तिथि देखिए। द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी शुभ मानी गई हैं।

फिर पक्ष देखिए। कृष्ण के मुकाबले शुक्ल।

अगर एक सोमवार पर शुभ नक्षत्र है और तिथि साधारण, और दूसरे पर शुभ तिथि है पर उन पाँच वर्जित नक्षत्रों में से कोई एक, तो बिना सोचे पहला लीजिए। नक्षत्र का दोष तिथि के लाभ से कहीं अधिक भारी है, इतना कि दूसरा सोमवार एक साधारण बुधवार से भी नीचे चला जाएगा।

खरीदना और डिलीवरी लेना, दो अलग प्रश्न हैं

लोग प्रायः गलत प्रश्न पूछते हैं। कागज़, लोन की मंज़ूरी और भुगतान व्यापारिक काम हैं, और आपने फाइनेंस का फ़ॉर्म किस दिन भरा, इसकी चिंता किसी शास्त्रीय नियम को नहीं है। मुहूर्त असल में उस क्षण का है जब वाहन पहली बार आपके हाथ में आता है और पहली बार आपको लेकर चलता है।

इसलिए बुकिंग तब कराइए जब डीलर करा सके। डिलीवरी का दिन आप चुनिए। शोरूम आपको वही दिन देना चाहेगा जिस दिन उसका स्टॉक खाली हो, और आप कह सकते हैं कि गाड़ी अगले सोमवार सुबह लेंगे। अगर डीलर मंगलवार या शनिवार से हटने को तैयार न हो, तो सामान्य व्यवहार यह है कि औपचारिकता उसी दिन पूरी कर लें और पहली सही सवारी अगले शुभ दिन के लिए रख लें।

एक बात और जानने योग्य है। पंचांग की यह गणना दिनों का क्रम बताती है, घड़ी का समय नहीं। चुने हुए सोमवार के भीतर सामान्य परंपरा सूर्योदय के बाद के पूर्वाह्न को चुनने की है, और उस दिन के राहु काल से बचने की, जो सोमवार को सूर्योदय के बाद दूसरे खंड में पड़ता है और दिनमान के अनुसार वर्ष भर खिसकता रहता है।

आपकी अपनी कुंडली कहाँ आती है

ऊपर लिखा सब सामान्य है। उस सोमवार को खरीदने वाले हर व्यक्ति के लिए एक जैसा है। इसके ऊपर एक व्यक्तिगत परत बैठती है, मुख्यतः उस दिन के नक्षत्र और आपके जन्म नक्षत्र का संबंध, और आपकी जन्मकुंडली में चंद्रमा की स्थिति। यदि आपका चंद्र निर्बल या पीड़ित है, तो चंद्र का दिन आपके लिए उतना काम नहीं कर रहा जितना सामान्य नियम बताता है।

अपनी जन्मकुंडली आप मुफ़्त कुंडली पर बना सकते हैं और तारीख तय करने से पहले देख सकते हैं कि आपका चंद्रमा वास्तव में कहाँ बैठा है। इसमें एक मिनट लगता है और उत्तर इससे उतनी बार बदलता है जितनी लोग अपेक्षा नहीं करते।

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