मंत्र
जप करने योग्य मंत्र।
बीज, गायत्री, दोष-निवारण और शास्त्रीय मंत्रों का चुनिंदा संग्रह। देवनागरी, IAST, हिंदी अर्थ, शास्त्रीय स्रोत उद्धृत।
बीज मंत्र
नौ ग्रहों में से प्रत्येक के लिए एकाक्षर बीज मंत्र। संक्षिप्त, स्मरणीय, परंपरागत रूप से ग्रह के वार पर 108 बार जपे जाते हैं।
Surya Beej Mantra
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
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Chandra Beej Mantra
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः
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Mangal Beej Mantra
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
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Budha Beej Mantra
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
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Guru Beej Mantra
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
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Shukra Beej Mantra
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
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Shani Beej Mantra
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
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Rahu Beej Mantra
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
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Ketu Beej Mantra
ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
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गायत्री मंत्र
लंबे वैदिक गायत्री मंत्र जो प्रत्येक ग्रह के पीछे के देवता का ध्यान करते हैं। संध्या समय जप, प्रायः उसी ग्रह के बीज मंत्र के बाद।
Surya Gayatri
ॐ भास्कराय विद्महे महातेजसे धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्
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Chandra Gayatri
ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृततत्त्वाय धीमहि तन्नः चन्द्रः प्रचोदयात्
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Mangal Gayatri
ॐ अङ्गारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नः भौमः प्रचोदयात्
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Budha Gayatri
ॐ सौम्यरूपाय विद्महे बाणेशाय धीमहि तन्नः बुधः प्रचोदयात्
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Guru Gayatri (Brihaspati)
ॐ वृषभध्वजाय विद्महे क्रुनिहस्ताय धीमहि तन्नो गुरुः प्रचोदयात्
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Shukra Gayatri
ॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्
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Shani Gayatri
ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि तन्नः मन्दः प्रचोदयात्
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Rahu Gayatri
ॐ नाकध्वजाय विद्महे पद्महस्ताय धीमहि तन्नो राहुः प्रचोदयात्
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Ketu Gayatri
ॐ अश्वध्वजाय विद्महे शूलहस्ताय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात्
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दोष-निवारण मंत्र
मंगल दोष, काल सर्प, पितृ दोष, साढ़े साती और श्रापित योग के लिए शास्त्रीय मंत्र। पुराण और तंत्र ग्रंथों में उद्धृत।
Mangal Dosha Shanti (Hanuman Bija)
ॐ हनुमते नमः
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Kaal Sarpa Dosha Shanti (Naga Stuti)
ॐ नागराजाय नमः
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Pitra Dosha Shanti (Pitra Tarpan + Vishnu)
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
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Sade Sati Shanti (Shani Stuti)
नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्
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Shrapit Dosha Shanti (Mahamrityunjaya Long-form)
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
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शास्त्रीय मंत्र
कुंडली से परे, किसी भी साधक के जपने योग्य सार्वभौमिक मंत्र। महामृत्युंजय, गायत्री, हनुमान चालीसा, विष्णु सहस्रनाम और अधिक।
Mahamrityunjaya Mantra
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
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Gayatri Mantra
ॐ भूर्भुवः स्वः
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Hanuman Chalisa (Dhyana verses)
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि
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Vishnu Sahasranama (Dhyana verses)
शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्
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Maha Lakshmi Beej
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद
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Saraswati Vandana
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
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Ganesh Vandana
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ
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Shiva Panchakshari
ॐ नमः शिवाय
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Aditya Hridayam (Opening verses)
आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्
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