नवग्रह शान्ति: नौ ग्रहों के लिए शास्त्रीय मंत्र और उपाय
जब कोई ग्रह आपकी कुंडली में पीड़ित हो, तब उसके शान्ति-उपाय का व्यावहारिक मार्गदर्शन। बीज मंत्र, रत्न, दान, और साप्ताहिक अनुष्ठान, और प्रत्येक उपाय का शास्त्रीय आधार स्पष्ट रूप से बताया गया है।
समीक्षक Vidhata Editorial Desk · अद्यतन
इस लेख में
वैदिक ज्योतिष के नौ ग्रह
नवग्रह यानी "नौ ग्रह" - शास्त्रीय वैदिक खगोलीय पिंड हैं: सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु (उत्तर चन्द्र-नोड), और केतु (दक्षिण चन्द्र-नोड)। प्रत्येक जीवन के विशेष क्षेत्र पर शासन करता है, और प्रत्येक आपकी कुंडली में बलवान, साधारण, या पीड़ित हो सकता है।
जब कोई ग्रह पीड़ित हो (नीच, अस्त, दुःस्थान में, या पाप-दृष्ट), तो वैदिक परम्परा विशिष्ट उपाय बताती है। इसलिए नहीं कि ग्रह "रुष्ट" है, बल्कि इसलिए कि उस ग्रह की ऊर्जा-तरंग को आप अपने दैनिक जीवन में अनुष्ठान, मंत्र, और व्यावहारिक कर्म से सुदृढ़ कर सकते हैं।
उपाय का सूत्र (सभी नौ के लिए समान)
प्रत्येक ग्रह की शान्ति चार-स्तरीय रचना का अनुसरण करती है:
१. बीज मंत्र - बीज-स्वर मंत्र, १०८ के गुणकों में जप २. रत्न - ज्योतिषीय पुष्टि के बाद, निर्धारित अंगुली और धातु में पहना जाए ३. दान - ग्रह के वार पर, उचित पात्र को दान की वस्तुएँ ४. आचरण-अभ्यास - दैनिक कर्म जो ग्रह के सकारात्मक रूप को व्यक्त करे
सूर्य - रविवार
बीज मंत्र: "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः" - पूर्ण अनुष्ठान के लिए ७,००० बार, या ४० दिन तक प्रतिदिन १०८ बार।
रत्न: माणिक्य अनामिका में, सोने या ताँबे में जड़ा। रविवार प्रातः सूर्य-पूजा के बाद धारण।
दान: गेहूँ, गुड़, ताँबे की वस्तुएँ, लाल वस्त्र - रविवार प्रातः वृद्ध पिता-तुल्य व्यक्तियों, ब्राह्मणों, या शिक्षकों को।
आचरण: सूर्योदय से पहले उठें। पूर्व मुख होकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें। प्रतिदिन १२ सूर्य नमस्कार। पिता और पिता-तुल्य पुरुषों का सम्मान करें।
कब करें: सूर्य ६/८/१२ भाव में हो, तुला में नीच, या बुध-शुक्र से अस्त।
चन्द्र - सोमवार
बीज मंत्र: "ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः" - अनुष्ठान के लिए ११,०००।
रत्न: मोती कनिष्ठा में, चाँदी में। सोमवार प्रातः धारण।
दान: चावल, दूध, सफ़ेद वस्त्र, चाँदी - सोमवार दोपहर से पहले माताओं, विधवाओं, या महिला-आश्रयों को।
आचरण: माता या मातृ-तुल्य व्यक्ति से नियमित मिलें। रात्रि १० बजे से पहले सोएँ। चाँदी के पात्र से जल पिएँ। पूर्णिमा को चन्द्र-प्रकाश में टहलें।
कब: चन्द्र ६/८/१२ में, वृश्चिक में नीच, या शनि की प्रबल दृष्टि में।
मंगल - मंगलवार
बीज मंत्र: "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" अथवा "ॐ हुं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्" - ७,०००।
रत्न: मूँगा दाएँ हाथ की अनामिका में, सोने या ताँबे में। मंगलवार।
दान: मसूर दाल, गुड़, ताँबा, लाल वस्त्र - मंगलवार सैनिकों, खिलाड़ियों, या छोटे बच्चों को।
आचरण: दैनिक शारीरिक व्यायाम। प्रातः-सायं हनुमान चालीसा। सप्ताह में एक बार प्रकृति में समय। क्रोध को व्यायाम में बदलें।
कब: मंगल दोष, मंगल कर्क में नीच, या ८वें भाव में पाप-दृष्ट।
बुध - बुधवार
बीज मंत्र: "ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः" - १७,०००।
रत्न: पन्ना कनिष्ठा में, सोने या चाँदी में। बुधवार।
दान: हरी मूँग दाल, पुस्तकें, लेखन-सामग्री, तुलसी पौधे - छात्रों, छोटे व्यापारियों, या बहनों को।
आचरण: प्रतिदिन ३० मिनट पठन। प्रत्येक सायं एक घंटे का मौन। साप्ताहिक रूप से जान-बूझकर नेटवर्किंग।
कब: बुध सूर्य से ३° के भीतर अस्त, मीन में नीच, या ६/८/१२ में।
बृहस्पति - गुरुवार
बीज मंत्र: "ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः" - १९,०००।
रत्न: पुखराज तर्जनी में, सोने में। गुरुवार।
दान: पीली मूँग दाल, हल्दी, धर्म-ग्रंथ, ब्राह्मणों को मिठाई। शिक्षकों, विद्वानों, या गुरुओं को।
आचरण: दैनिक २० मिनट ध्यान। शास्त्र या ज्ञान-साहित्य पढ़ें। स्नान के बाद हल्दी का तिलक लगाएँ।
कब: बृहस्पति मकर में नीच, ६/८/१२ में, या दृष्टि से कमज़ोर।
शुक्र - शुक्रवार
बीज मंत्र: "ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः" - १६,०००।
रत्न: हीरा या सफ़ेद नीलम मध्यमा में, प्लैटिनम या सफ़ेद सोने में। शुक्रवार।
दान: सफ़ेद वस्त्र, इत्र, चीनी, दही - महिला कलाकारों, नर्तकियों, संगीतकारों को; जो विवाह नहीं कर सकते उनका विवाह प्रायोजित करें।
आचरण: स्वयं को सौंदर्य से घिरा रखें। घर स्वच्छ और सुगन्धित रखें। अपनी कला विकसित करें। प्रेम और प्रणय को नियमित स्थान दें।
कब: शुक्र कन्या में नीच, अस्त, या ६/८/१२ में।
शनि - शनिवार
बीज मंत्र: "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" - २३,०००।
रत्न: नीलम मध्यमा में, लोहे या स्टील में। शनिवार। चेतावनी: ग़लत नीलम शनि को शान्त करने के बजाय भड़काता है। केवल ज्योतिषीय पुष्टि और ३ दिन के परीक्षण के बाद।
दान: काले तिल, सरसों का तेल, लोहा, कम्बल - वृद्ध दरिद्रों, अंधों, विकलांगों, या मज़दूरों को शनिवार।
आचरण: प्रतिदिन सूर्योदय से पहले उठें, बिना अपवाद। साप्ताहिक एक घंटा शारीरिक श्रम या सेवा। प्रत्येक वृद्ध का सम्मान करें।
कब: साढ़े साती, अष्टम शनि, मेष में नीच, या जन्म-कुंडली में शनि-मंगल विरोध।
राहु - शनिवार (शनि से ८.५ गुना तीव्रता)
बीज मंत्र: "ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः" - १८,०००।
रत्न: गोमेद मध्यमा में, चाँदी में।
दान: तिल, सरसों, सीसा, नीला या धुएँ-रंग का वस्त्र, कम्बल - कुष्ठ-रोगियों या हाशिए पर पड़े लोगों को शनिवार।
आचरण: नशे से कठोर परहेज़। दैनिक ध्यान आपकी ढाल है। विदेशी या अपरम्परागत मार्गों को अपनाएँ।
कब: राहु महादशा, राहु केन्द्र/त्रिकोण में, या काल-सर्प योग।
केतु - मंगलवार (मंगल से ८.५ गुना तीव्रता)
बीज मंत्र: "ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः" - ७,०००।
रत्न: लहसुनिया मध्यमा में, चाँदी में।
दान: बहु-रंगी वस्त्र, तिल, कम्बल साधुओं, संन्यासियों, या बेघर लोगों को। मंगलवार।
आचरण: आध्यात्मिक अभ्यास - ध्यान, दर्शन का अध्ययन। उस क्षेत्र पर भरोसा करें जहाँ आप अकारण ही जानते हैं। आसक्ति त्यागें।
कब: केतु महादशा, केतु १/८ भाव में, या जन्म-कुंडली में सूर्य-केतु युति।
सबसे महत्वपूर्ण नियम
ज्योतिषीय मार्गदर्शन के बिना एक साथ कई ग्रहों के उपाय न मिलाएँ। नवग्रह स्वतंत्र शक्तियाँ नहीं हैं - एक को बल देने से दूसरा असन्तुलित हो सकता है। शास्त्रीय ज्योतिषी सलाह देते हैं कि सर्वाधिक पीड़ित एकल ग्रह के लिए पूरे ४० दिन (एक मंडल) तक उपाय करें, फिर अगले पर विचार करें।
यदि आप अनिश्चित हैं कि आपकी कुंडली में सबसे पीड़ित ग्रह कौन-सा है, तो विधाता जन्म कुंडली ग्रह-बल खंड में दिखाती है, और आचार्य प्रारम्भिक बिन्दु सुझा सकते हैं।
स्रोत
- Brihat Parashara Hora Shastra (BPHS) - chapter 3 on the nature of the nine grahas, and the closing chapters on remedial measures (japa, charity, propitiation). The navagraha bija mantras and their japa counts come from the puranic and tantric ritual tradition, not from BPHS.
- Saravali by Kalyana Varma - chapters on planetary qualities, mantras, and propitiation.
- Phaladeepika by Mantreshwara - on planetary results and their classical remedies.
Frequently asked
Common questions
Do I need to do remedies for all nine planets at once?+
No. Classical astrologers recommend addressing the single most afflicted planet first, for a full 40 day cycle, before moving to the next. Combining remedies for multiple planets at once without guidance can imbalance the chart rather than help it.
How do I know which planet needs a remedy in my chart?+
Look for a planet that is debilitated, combust, sitting in a difficult house, or receiving a hard aspect from a malefic. The Vidhata Janm Kundali shows planetary strengths in its Strengths section if you are not sure where to start.
Is it safe to wear any Blue Sapphire for Saturn?+
No. An incorrect Blue Sapphire is known to intensify Saturn's difficult effects rather than pacify them. It should only be worn after astrological confirmation and a short trial period, not bought and worn on its own.
What does a navagraha shanti remedy actually involve?+
Each planet's remedy follows the same four part structure: a bija mantra chanted in multiples of 108, a gemstone worn on the correct finger and metal, charity given on the planet's weekday to the right recipient, and a daily behavioral practice that channels the planet's positive side.