पंच महापुरुष · बीपीएचएस अध्याय 36, फलदीपिका 6.4

मालव्य योग (पंच महापुरुष)

शुक्र स्वराशि (वृषभ, तुला) या उच्च (मीन) में और किसी केन्द्र (1, 4, 7, 10) में।

मालव्य योग पाँच पंच महापुरुष योगों में चौथा है तथा शुक्र का है। यह योग तब बनता है जब शुक्र स्वराशि (वृषभ या तुला) में हो या मीन में उच्च हो और साथ ही केन्द्र भाव में हो। मालव्य परिष्कार, सौन्दर्य, साझेदारियों में सामंजस्य, कलात्मक प्रतिभा तथा संघर्ष के स्थान पर लालित्य से अर्जित भौतिक सुख का योग है।

How मालव्य योग (पंच महापुरुष) forms

मालव्य योग तब बनता है जब शुक्र स्वराशि (वृषभ या तुला) में हो या मीन में उच्च हो, और साथ ही लग्न से किसी केन्द्र भाव (1, 4, 7, 10) में हो। चतुर्थ में मीन का शुक्र, सप्तम में तुला का शुक्र, अथवा दशम में वृषभ का शुक्र शास्त्रीय उदाहरण हैं। मीन का शुक्र दुगुना बलवान है क्योंकि मीन शुक्र की क्रियात्मक शुभता का स्थान भी है।

Effects on the native

जातक पर फल: शास्त्रीय अर्थ में शारीरिक आकर्षण (परिष्कृत लक्षण, समानुपातिक रूप), कला, संगीत, फैशन, आतिथ्य, आभूषण अथवा प्रत्येक उस वृत्ति में प्रतिभा जहाँ सौन्दर्यबोध उत्पाद हो, सामंजस्यपूर्ण विवाह जीवन, भौतिक सुख, परिष्कृत रुचि, तथा असामान्य सामाजिक लालित्य। अनेक प्रसिद्ध कलाकार, डिज़ाइनर, होटल-संचालक तथा रचनात्मक निदेशक मालव्य प्रबल पाते हैं।

Strength factors

मालव्य सबसे बलवान तब है जब शुक्र अस्त न हो (शुक्र, बुध की भाँति, सूर्य के निकट जा सकता है), दुस्थान में वक्री न हो, और शनि या मंगल से निकट से पीड़ित न हो। सप्तम में मीन का शुक्र (उच्च के माध्यम से स्वगरिमा, साझेदारी का केन्द्र) विवाह-अनुकूल मालव्य विन्यासों में सबसे प्रबल है। बृहस्पति या बुध की दृष्टि और बल देती है।

Cancellation and limitations

भंगकारी कारक: अस्त (शुक्र के लिए बुध की तुलना में कम सामान्य परंतु संभव), दुस्थान में वक्री शुक्र, शनि से निकट पीड़ा (तपस्या जो शुक्र-सुख को दबा देती है), मंगल से निकट पीड़ा (आवेग जो सामंजस्य को भंग करता है), तथा शुक्र का स्वराशि में पर 6/8/12 में होना (केन्द्र-शर्त भंग)।

Archetype

मालव्य का प्रतिरूप: वह डिज़ाइनर जिसका कार्य अद्वितीय है, वह कलाकार जिसकी उपस्थिति कक्ष को ऊँचा कर देती है, वह होटल-स्वामी जिसका आतिथ्य सच्चा है, वह जीवनसाथी जिसकी सामंजस्य गृहस्थी को आकार देती है। बोहेमियन नहीं, परिष्कृत व्यक्ति।

Classical sources

बीपीएचएस अध्याय 36 मालव्य को पंच महापुरुष का चौथा बताता है। फलदीपिका 6.4 विवाह और भौतिक-सुख फलों पर बल देती है। सारावली मालव्य को कलात्मक वृत्तियों और सामंजस्यपूर्ण गृहस्थी से जोड़ती है।

Frequently asked questions about मालव्य योग (पंच महापुरुष)

मालव्य योग कैसे बनता है?+

शुक्र को स्वराशि (वृषभ या तुला) में या मीन में उच्च होना चाहिए और साथ ही लग्न से किसी केन्द्र भाव (1, 4, 7, 10) में स्थित होना चाहिए।

मालव्य योग क्या देता है?+

शारीरिक आकर्षण, कला और परिष्कृत वृत्तियों में प्रतिभा, सामंजस्यपूर्ण विवाह जीवन, भौतिक सुख, परिष्कृत रुचि तथा सामाजिक लालित्य।

क्या मालव्य विवाह के लिए शुभ है?+

हाँ, विशेषकर। शुक्र विवाह का कारक है, और प्रबल मालव्य सामंजस्यपूर्ण विवाहित जीवन देता है। सप्तम में मीन का शुक्र विवाह-अनुकूल मालव्य के सबसे प्रबल विन्यासों में है।

मालव्य योग को क्या भंग करता है?+

अस्त, दुस्थान में वक्री शुक्र, शनि या मंगल से निकट पीड़ा, अथवा केन्द्र-नियम का उल्लंघन।

मालव्य भद्र से कैसे भिन्न है?+

भद्र बुध का महापुरुष योग है और बौद्धिक उपहार देता है; मालव्य शुक्र का है और सौन्दर्यबोधक उपहार देता है। दोनों एक साथ आ सकते हैं और एक-दूसरे के पूरक होते हैं।

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