नवरात्रि: ९ रातों में से प्रत्येक वास्तव में क्या दर्शाती है

अधिकांश लोग नवरात्रि के दौरान बिना यह जाने उपवास करते हैं कि प्रत्येक रात दुर्गा के एक अलग रूप का सम्मान करती है। यहाँ नवदुर्गा का संक्षिप्त संदर्श है - शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक।

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समीक्षक Vidhata Editorial Desk · अद्यतन

In this article
  1. नौ रातें ही क्यों
  2. नौ रूप - एक प्रति रात
  3. कैसे पालन करें
  4. मनोवैज्ञानिक संरचना
  5. हर नवरात्रि में आप एक छोटी चीज़

नौ रातें ही क्यों

संख्या नौ वैदिक ब्रह्मांडविज्ञान में संरचनात्मक है - नौ ग्रह, नौ अंक, भक्ति के नौ रूप, शरीर के नौ द्वार। नवरात्रि ("नौ रातें") कैलेंडर की मान्यता है कि स्त्रैण शक्ति के अवतरण और आरोहण को नौ क्रमिक चरणों की आवश्यकता है, एक शिखर घटना नहीं।

वर्ष में तकनीकी रूप से चार नवरात्रियाँ हैं। शारदीय नवरात्रि (शरद, अश्विन माह) और चैत्र नवरात्रि (वसंत, चैत्र माह) सार्वजनिक रूप से मनाई जाने वाली दो हैं।

नौ रूप - एक प्रति रात

प्रत्येक रात दुर्गा के एक विशिष्ट रूप का सम्मान करती है, एक निश्चित क्रम में:

दिन १ - शैलपुत्री (पर्वतों की पुत्री)। जड़ित, ज़मीनी, स्थिर। रंग: लाल। आरंभिक बिंदु - अपनी नींव खोजना।

दिन २ - ब्रह्मचारिणी (तपस्विनी साधिका)। अनुशासन, आत्म-संयम, तैयारी। रंग: नीला/श्वेत। यात्रा को स्थान देने के लिए आप क्या त्यागते हैं।

दिन ३ - चंद्रघंटा (चंद्र-घंटा)। बोध की स्पष्टता, साहस। रंग: पीला। वह चरण जहाँ आप स्पष्ट देखते हैं कि आप किसके विरुद्ध हैं।

दिन ४ - कूष्माण्डा (ब्रह्मांड-अंडा)। सृजक देवी, अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड उत्पन्न करती हैं। रंग: हरा।

दिन ५ - स्कंदमाता (स्कंद/कार्तिकेय की माता)। मातृ संरक्षण। रंग: ग्रे।

दिन ६ - कात्यायनी (योद्धा रूप)। उग्र सक्रिय चरण। रंग: नारंगी।

दिन ७ - कालरात्रि (अंधेरी रात)। अज्ञान, भय, अहंकार की विनाशिनी। रंग: श्वेत। सबसे कठिन, सबसे गहरी रात।

दिन ८ - महागौरी (दीप्त श्वेत)। कालरात्रि के विनाश के बाद शुद्धता। रंग: गुलाबी।

दिन ९ - सिद्धिदात्री (पूर्णता की दात्री)। सभी सिद्धियाँ प्रदान। रंग: बैंगनी। नौ दिनों का फल।

कैसे पालन करें

मुख्यधारा अभ्यास:

  1. ९ दिनों में से कुछ या सभी का व्रत रखें
  2. दिन १ को कलश जलाएँ
  3. प्रत्येक दिन प्रात:कालीन आरती करें
  4. दिन का रंग पहनें
  5. दुर्गा सप्तशती पढ़ें
  6. दिन ९ पर कन्जक पूजा करें
  7. विजयदशमी मनाएँ

मनोवैज्ञानिक संरचना

नौ रातें एक आंतरिक यात्रा बनाती हैं:

  1. दिन १-३ - तैयारी: ज़मीनी, संयमित, बोध
  2. दिन ४-६ - सहभागिता: उत्पन्न, पोषण, लड़ना
  3. दिन ७-९ - परिवर्तन: नष्ट, शुद्ध, पूरा

यह तीन-चरण चाप दुनिया भर के शास्त्रीय दीक्षा अनुष्ठानों का वही आकार है।

हर नवरात्रि में आप एक छोटी चीज़

एक गुण चुनें जिसे रिलीज़ करना है (दिन ७ का कार्य) और एक गुण बढ़ाना है (दिन ४ का कार्य)। नौ दिनों के लिए, याद आने पर, स्वयं को दोनों की याद दिलाएँ।

यही दोहराई गई, मूर्त ध्यान की वह तरह है जिसे त्योहार की संरचना सक्षम करती है। त्योहार मुफ़्त है।

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