मंगलवार हनुमान पूजा: साहस और सुरक्षा का साप्ताहिक अनुष्ठान

मंगलवार हनुमान का दिन है। साप्ताहिक हनुमान पूजा उत्तर भारत के सर्वाधिक पालन किए जाने वाले व्रतों में से एक है - साहस, सुरक्षा, भय-मुक्ति, और शनि-शांति के लिए। यहाँ है उचित विधि।

VEVidhata Editorial Desk· Parashari Jyotish, Muhurta, KP, Lal Kitab, dasha & transit analysis
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समीक्षक Vidhata Editorial Desk · अद्यतन

In this article
  1. मंगलवार हनुमान के लिए क्यों
  2. तैयारी (मंगलवार प्रातः)
  3. विधि - चरण-दर-चरण
  4. हनुमान चालीसा का महत्व
  5. विशेष संदर्भ
  6. क्या न करें
  7. ४० मंगलवार का चालीसा-व्रत
  8. अंतिम बात

मंगलवार हनुमान के लिए क्यों

मंगलवार मंगलवार ही है - मंगल ग्रह से शासित। हनुमान, रामायण के वानर-देव, मंगल की योद्धा-ऊर्जा को भक्ति में परिवर्तित किए हुए हैं। वे प्रतिनिधित्व करते हैं:

  • साहस (वह जो स्वयं पर शंका नहीं करता)
  • निःस्वार्थ सेवा (राम के प्रति उनका समर्पण)
  • शक्ति (विशेषतः मानसिक और भावनात्मक, शारीरिक से परे)
  • नकारात्मक शक्तियों, भय, हानि से रक्षा
  • शनि-शांति - हनुमान को शनि पर अधिकार प्राप्त है

मंगल-शक्ति को मंगलवार के दिन सम्मान देना उसे आक्रामकता से उपयोगिता में मोड़ देता है। यह मंगल दोष, साढ़े साती, और पुराने भय-संस्कारों के लिए सबसे अनुशंसित साप्ताहिक उपाय है।

तैयारी (मंगलवार प्रातः)

व्यक्तिगत तैयारी:

  • सूर्योदय से पहले उठें; स्नान कर के लाल या सिंदूरी वस्त्र पहनें
  • मंगलवार को क्षौर (बाल-नाख़ून काटना) न करें - शास्त्र-निषेध
  • दिन के लिए सात्विक संकल्प - माँस, मद्य, क्रोध से दूर रहें

सामग्री:

  • हनुमान जी की मूर्ति या चित्र (सिंदूर-लेपित)
  • लाल या केसरी फूल - जवाकुसुम (गुड़हल) सर्वोत्तम
  • सिंदूर और चमेली का तेल (हनुमान जी को सिंदूर-चमेली-तेल का लेप अति प्रिय है)
  • लाल चंदन
  • गुड़, चना, और बूँदी के लड्डू (हनुमान जी का प्रिय भोग)
  • एक तेल का दीया (तिल या सरसों के तेल से)
  • तुलसी पत्र
  • हनुमान चालीसा या सुंदर काण्ड पुस्तक

विधि - चरण-दर-चरण

१. आचमन और संकल्प। बैठें, तीन बार आचमन करें (एक चम्मच जल मुँह में लें)। संकल्प लें - "मैं आज मंगलवार के दिन श्री हनुमंत-कृपा प्राप्ति हेतु, साहस-रक्षा-शनि-शांति निमित्त यह पूजा कर रहा/रही हूँ।"

२. गणेश-स्मरण। हर पूजा में पहले गणेश। "ॐ गं गणपतये नमः" - ११ बार।

३. आसन-पूजन और दीप-प्रज्ज्वलन। मूर्ति को लाल वस्त्र पर स्थापित करें। तेल का दीया जलाएँ - हनुमान को तेल-दीप अति प्रिय है (घी-दीप नहीं)।

४. सिंदूर-चमेली लेप। हनुमान चित्र/मूर्ति पर सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर लगाएँ। यह सर्वाधिक शक्तिशाली अंग है इस पूजा का।

५. पुष्प-अर्पण। लाल जवाकुसुम / गेंदा अर्पित करें। मंत्र - "ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्"

६. हनुमान चालीसा पाठ। ४० चौपाइयों का पाठ। यदि समय हो - सात बार। कम से कम एक बार। मंगलवार को अच्छा है पूरा सुंदर काण्ड भी पढ़ना।

७. नैवेद्य। गुड़-चना अर्पित करें। बूँदी के लड्डू भी। तुलसी पत्र अवश्य रखें - हनुमान को तुलसी अति प्रिय है।

८. आरती। "आरती कीजै हनुमान लला की" - पाँच बार दीप घुमाएँ।

९. प्रदक्षिणा और प्रणाम। तीन या ग्यारह बार मूर्ति की प्रदक्षिणा करें (यदि घर में चल सके)।

१०. प्रसाद वितरण। भोग का प्रसाद परिवार में बाँटें। थोड़ा बंदरों को अर्पित करें - हनुमान को यह अति प्रिय है।

हनुमान चालीसा का महत्व

तुलसीदास द्वारा रचित ४० चौपाइयों की यह स्तुति इतनी शक्तिशाली है कि अकेले इसी का साप्ताहिक पाठ अनेक बाधाओं को दूर करता है। प्रामाणिक परम्परा कहती है - मंगलवार और शनिवार को १०८ बार पाठ अति-संकट में रक्षक है। दैनिक एक पाठ भी कुंडली में मंगल और शनि दोनों को संतुलित करता है।

विशेष संदर्भ

मंगल दोष वालों के लिए: हर मंगलवार उपवास (एक समय फलाहार) + हनुमान चालीसा + सिंदूर-चमेली अर्पण। ४० मंगलवार लगातार करने पर मांगलिक प्रभाव में स्पष्ट कमी देखी गई है।

साढ़े साती चलने वालों के लिए: हनुमान शनि के नियंत्रक हैं। कथा है - हनुमान ने शनि को रावण की कारा से मुक्त किया था; तब से शनि ने वचन दिया कि हनुमान-भक्त को कष्ट नहीं देगा। इसी कारण साढ़े साती में हनुमान-उपासना सर्वाधिक प्रभावी है।

भय और बुरे स्वप्न वालों के लिए: सोने से पहले हनुमान चालीसा पाठ। तकिये के नीचे राम-नाम रखें।

क्या न करें

  • मंगलवार को नमक न खाएँ (कठोर व्रत वाले)
  • तेल मालिश न करें (तेल हनुमान को अर्पित होता है - स्वयं पर लगाना अनादर माना जाता है)
  • घर में क्लेश न करें - हनुमान शांत-चित्त भक्तों पर प्रसन्न होते हैं
  • माँस-मद्य पूर्णतः वर्जित

४० मंगलवार का चालीसा-व्रत

जो भक्त किसी विशेष लक्ष्य के साथ हनुमान-कृपा चाहते हैं - परीक्षा, मुक़दमा, स्वास्थ्य-संकट - वे ४० मंगलवार लगातार चालीसा-पाठ का व्रत लेते हैं। ४१वें मंगलवार उद्यापन। इस संकल्प के बल पर असाध्य लक्ष्य भी प्राप्त होते देखे गए हैं।

अंतिम बात

हनुमान सबसे सुलभ देव हैं। न आपकी पूजा को संस्कृत-शुद्धता चाहिए, न महंगी सामग्री। एक तेल का दीया, एक चालीसा-पाठ, और एक "जय श्री राम" - पर्याप्त है। शर्त एक ही है - सच्चे मन से, मंगलवार के दिन।

जय बजरंगबली।

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