शास्त्रीय मंत्र
Mahamrityunjaya Mantra
Mahamrityunjaya
Shiva
The auspicious one · Mondays, Pradosh tithi, Maha Shivaratri
मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
oṃ tryambakaṃ yajāmahe sugandhiṃ puṣṭivardhanam. urvārukamiva bandhanānmṛtyormukṣīya māmṛtāt
हम त्रिनेत्र शिव की उपासना करते हैं, जो सुगंधित हैं और सबका पोषण करते हैं। जैसे पकी ककड़ी अपनी बेल से स्वयं मुक्त हो जाती है, वैसे हम मृत्यु के बंधन से मुक्त हों, परंतु अमरत्व से नहीं।
यह मंत्र क्या करता है
हम त्रिनेत्र शिव की उपासना करते हैं, जो सुगंधित हैं और सबका पोषण करते हैं। जैसे पकी ककड़ी अपनी बेल से स्वयं मुक्त हो जाती है, वैसे हम मृत्यु के बंधन से मुक्त हों, परंतु अमरत्व से नहीं।
कब जप करें
जीवन के किसी भी समय, प्रतिदिन। विशेष रूप से बीमारी में (अपनी या किसी प्रिय जन की), शोक में, शल्य-चिकित्सा के समय, और दीर्घ शनि या राहु गोचर के दौरान।
अनुशंसित संख्या: प्रतिदिन 108 बार
शास्त्रीय स्रोत
Rigveda 7.59.12; Yajurveda recensions; centrepiece of Shaiva practice
इस मंत्र का अभ्यास करें
श्वास गति, संकल्प इनपुट और स्ट्रीक ट्रैकिंग के साथ 5-चरण जप प्रवाह आज़माएँ।
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