27 में से नक्षत्र 2 · 13°20' से 26°40' मेष
भरणी नक्षत्र
भरणी
भरणी दूसरा नक्षत्र है, जो मेष राशि के 13°20' से 26°40' तक विस्तृत है। इसके अधिष्ठाता देवता यम हैं, धर्म एवं मृत्यु के स्वामी, और स्वामी ग्रह शुक्र है। यह संयोजन राशिचक्र में सर्वाधिक उल्लेखनीय में से एक है: एक शुक्र-स्वामित्व वाला नक्षत्र जिसका देवता अंत का स्वामी है। भरणी जातक दोनों धागे साथ लाते हैं: सौंदर्य, इन्द्रिय-तृप्ति और सृजनात्मक रूप के प्रति असाधारण संवेदनशीलता, तथा अंत, संक्रमण और निर्णयों के नैतिक भार के प्रति असाधारण परिपक्वता।
- स्वामी ग्रह
- शुक्र
- देवता
- यम (मृत्यु एवं धर्म के स्वामी)
- प्रतीक
- योनि (स्त्री प्रजनन अंग) अथवा त्रिकोणीय मिट्टी का घड़ा
- राशि
- मेष
- गण / योनि / नाड़ी
- Manushya · Elephant · Madhya
- वर्ण
- Mlechha
प्रतीकात्मकता
योनि प्रमुख प्रतीक के रूप में सृजन, गर्भधारण और रूप को साकार करने के धीमे कार्य की ओर इंगित करती है। वैकल्पिक प्रतीक मिट्टी का घड़ा (अंतिम संस्कार और सांस्कारिक कर्मों में प्रयुक्त कलश) भी वही भाव वहन करता है: एक पात्र जो जीवन देता और लेता दोनों है। भरणी एक साथ दाई और दाहसंस्कारकर्ता दोनों का नक्षत्र है।
भरणी जातकों का व्यक्तित्व
भरणी जातकों का व्यक्तित्व: भावनात्मक रूप से तीव्र, प्रायः उत्कट, सही और गलत की सशक्त समझ जो कभी-कभी निर्णय के रूप में प्रकट होती है। वे मृत्यु या नैतिक जटिलता से सामना होकर शीघ्र परिपक्व हो जाते हैं। शुक्र के स्वामित्व से वे सृजनात्मक रूप से प्रतिभाशाली हैं और यम के प्रभाव से उनमें एक स्पष्ट गरिमा है। वे श्वेत-श्याम सोच की ओर झुकाव रखते हैं जो आयु के साथ कोमल हो जाता है। मनुष्य गण उन्हें मानवीय, संबंध-केन्द्रित गुण देता है, परंतु म्लेच्छ वर्ण (एक असामान्य शास्त्रीय निर्धारण) यह संकेत देता है कि वे विश्वास की माँग पर रूढ़ि तोड़ने को तैयार रहते हैं।
चार पाद
भरणी के चार पाद इस प्रकार हैं: मेष-सिंह (पहला, सूर्य नवांश, राजसी एवं नाटकीय), मेष-कन्या (दूसरा, बुध, क्रमबद्ध), मेष-तुला (तीसरा, शुक्र पर शुक्र, सर्वाधिक कलात्मक), और मेष-वृश्चिक (चौथा, मंगल पर मंगल, सर्वाधिक तीव्र एवं कर्म से भारी)।
करियर की प्रवृत्तियाँ
करियर रुझान: कला और डिज़ाइन, दाईपन और प्रसूति शास्त्र, जीवन के अंत की देखभाल और उपशामक चिकित्सा, न्यायपालिका और कानून (यम धर्म के न्यायाधीश हैं), शव-गृह सेवाएँ, आतिथ्य और भोजन, फैशन और सौंदर्य उद्योग, प्रजनन चिकित्सा, और प्रत्येक वह कार्य जिसमें सृजन और अंत दोनों को धारण करना पड़े। बहुत से वकील, न्यायाधीश और शव-संस्कारकर्ता भरणी प्रबल कुंडलियों में होते हैं।
विवाह अनुकूलता
विवाह संगति: भरणी का गण मनुष्य, योनि गज, नाड़ी मध्य, वर्ण म्लेच्छ है। गज-योनि का जोड़ीदार रोहिणी (वृषभ) है। मनुष्य-गण के साथी अच्छे मिलते हैं; राक्षस-गण कम मिलते हैं। भरणी जातक प्रायः 24 से 30 वर्ष के बीच विवाह करते हैं, अक्सर ऐसे साथी से जो हल्केपन के बजाय गंभीरता में उनसे मेल खाता हो।
शास्त्रीय रूप से अनुकूल
- रोहिणी (Serpent योनि)
- पूर्व फाल्गुनी (Rat योनि)
- पूर्वाषाढ़ा (Monkey योनि)
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स्वास्थ्य विषय
स्वास्थ्य विषय: प्रजनन एवं स्त्री रोग संबंधी समस्याएँ, आँखों का तनाव, सिर की चोटें, गुर्दे की संवेदनशीलता (शुक्र गुर्दों का स्वामी है), और मनोदशा परिवर्तन की प्रवृत्ति। शास्त्र विशेष रूप से भरणी की स्त्रियों में मासिक धर्म और प्रजनन संबंधी चिंताओं को चिह्नित करते हैं, जो आयुर्वेदिक देखभाल से अच्छी तरह उत्तर देती हैं।
आध्यात्मिक रुझान
आध्यात्मिक रूप से, भरणी कर्म के प्रति सर्वाधिक जागरूक नक्षत्रों में से एक है। यम देवता जातक को कर्म-फल के प्रति संवेदनशील बनाते हैं। बहुत से भरणी जातक हानि के परिवर्तनकारी अनुभव के बाद जीवन में देर से गंभीर साधक बन जाते हैं।
शास्त्रीय स्रोत
बीपीएचएस भरणी का दशा स्वामी शुक्र को नियुक्त करती है। फलदीपिका भरणी जातकों की नैतिक गंभीरता का उल्लेख करती है। बृहत् संहिता यम को इस नक्षत्र का देवता बताती है तथा इसे उग्र (तीव्र) नक्षत्रों में सूचीबद्ध करती है, जो निर्णायकता मांगने वाले कार्यों के लिए उपयुक्त हैं।
The dasha lord शुक्र starts every भरणी native's Vimshottari sequence. Read the शुक्र Mahadasha effects page for what this Mahadasha brings.
भरणी नक्षत्र के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भरणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?+
विंशोत्तरी दशा प्रणाली में शुक्र भरणी का स्वामी है। देवता यम (धर्म एवं मृत्यु के स्वामी) हैं। यह संयोजन शुक्र-कोमल और यम-गंभीर स्वभाव उत्पन्न करता है।
क्या भरणी नक्षत्र शुभ है या कठिन?+
दोनों में से कोई भी सर्वथा नहीं। यह उग्र (तीव्र) नक्षत्रों में से एक है और शीघ्र परिपक्व, नैतिक रूप से गंभीर स्वभाव देता है। आरंभिक वर्ष चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं; उत्तरवर्ती वर्ष प्रायः उल्लेखनीय उपलब्धियाँ देते हैं।
भरणी के साथ सर्वाधिक संगत नक्षत्र कौन सा है?+
रोहिणी (गज-योनि की जोड़ीदार) शास्त्रीय जोड़ी है। पूर्व फाल्गुनी और पूर्व आषाढ़ा (भी शुक्र-स्वामित्व वाले) इस नक्षत्र की संवेदना साझा करते हैं। मानक अष्टकूट गणना सर्वाधिक मायने रखती है।
भरणी जातक के लिए कौन सा करियर अनुकूल है?+
कला, डिज़ाइन, फैशन, न्यायपालिका और कानून, दाईपन और प्रसूति शास्त्र, उपशामक चिकित्सा, प्रजनन देखभाल, आतिथ्य, और प्रत्येक वह वृत्ति जो सृजन और अंत दोनों को सम्मान के साथ धारण करने की मांग करे।
भरणी की महादशा कब आती है?+
भरणी जातक का जीवन शुक्र महादशा (भरणी का स्वामी ग्रह) से आरंभ होता है। शुक्र महादशा 20 वर्ष की होती है, विंशोत्तरी में सबसे लंबी।
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