Nakshatra 1 of 27 · 0°00' से 13°20' मेष

अश्विनी Nakshatra

अश्विनी

अश्विनी सत्ताईस नक्षत्रों में पहला है, जो मेष राशि के आरंभिक 13°20' अंशों में स्थित है। इसके अधिष्ठाता देवता अश्विनी कुमार हैं, ऋग्वेद के दिव्य जुड़वाँ चिकित्सक, जो रक्षा और पुनर्जीवन का कार्य करते हैं। स्वामी ग्रह केतु है, जो इस नक्षत्र को त्वरित, मोक्षकारक तथा कभी-कभी अधीर गुण प्रदान करता है। अश्विनी में जन्म लेने वाला जातक एक द्वार खोलने वाला स्वभाव लेकर आता है: नये कार्य आरंभ करना, शीघ्र गति, और उन रोगों को ठीक करना जिन्हें दूसरों ने छोड़ दिया हो।

Ruling planet
केतु
Deity
अश्विनी कुमार (दिव्य जुड़वाँ चिकित्सक)
Symbol
घोड़े का सिर
Rashi
मेष
Gana / Yoni / Nadi
Deva · Horse · Adi
Caste (varna)
Vaishya

Symbolism

घोड़े का सिर प्रतीक के रूप में गति, सहनशक्ति और आगे बढ़ने की इच्छा को दर्शाता है। बृहत् संहिता अश्विनी को राशिचक्र के दिव्य संदेशवाहक तथा आपातकालीन प्रत्युत्तरक के रूप में स्थापित करती है। अश्विनी जातक प्रायः पहले कार्य करते हैं और बाद में स्पष्टीकरण देते हैं, और उनका सर्वश्रेष्ठ कार्य सतत अभियानों के बजाय आरंभिक चालों में होता है।

Personality of अश्विनी natives

शास्त्रीय टीकाओं के अनुसार अश्विनी जातकों का व्यक्तित्व: साहसी, स्वतंत्र, शीघ्र निर्णायक, अग्रणी, कभी-कभी आवेगी, जीवन भर युवा दिखने वाले, चिकित्सा, खेल और साहसिक कार्यों की ओर आकर्षित। वे तत्काल निर्णय लेते हैं और शायद ही उन पर पुनर्विचार करते हैं। नौकरशाही और धीमे लोगों से उन्हें अधीरता हो सकती है। केतु के स्वामित्व से क्रिया के नीचे एक वैराग्य की रेखा रहती है: अश्विनी जातक तीव्र दिखते हैं किंतु शायद ही किसी से चिपकते हैं।

The four padas

अश्विनी के चार पाद इस प्रकार हैं: मेष-मेष (पहला पाद, नवांश में मंगल का), मेष-वृषभ (दूसरा, शुक्र नवांश, अधिक इन्द्रिय-संवेदी), मेष-मिथुन (तीसरा, बुध नवांश, अधिक संप्रेषक एवं चतुर), और मेष-कर्क (चौथा, चन्द्र नवांश, सबसे कोमल पाद)। पहला और चौथा पाद गण्डांत के निकट हैं और कर्म की दृष्टि से सबसे तीव्र माने जाते हैं।

Career inclinations

करियर रुझान: चिकित्सा (विशेषकर आपातकालीन चिकित्सा, आयुर्वेद, अश्व पशु चिकित्सा), शल्य चिकित्सा, खेलकूद और एथलेटिक्स, मोटर वाहन और विमानन, सेना तथा बचाव सेवाएँ, प्रेरक वक्तृत्व, संस्थापक स्तर पर उद्यमिता, बिक्री, तथा प्रत्येक वह कार्य जहाँ गति और तत्क्षण समाधान ही उत्पाद हो। अश्विनी जातक प्रायः उद्यम आरंभ करते हैं, उन्हें बनाए रखने के बजाय।

Marriage compatibility

विवाह संगति: अश्विनी का गण देव, योनि अश्व, नाड़ी आदि, वर्ण वैश्य है। शास्त्रीय अष्टकूट में अश्विनी अश्व-योनि के पूरक नक्षत्रों (शतभिषा अश्व-योनि का जोड़ीदार है) तथा देव-गण के साथियों से अच्छा मेल खाती है। भरणी (आगे का पड़ोसी) अश्विनी के लिए सामान्यतः कठिन मेल माना जाता है। विवाह प्रायः जल्दी होता है, अंतिम किशोरावस्था या बीसवें दशक में, विशेषकर जब चन्द्र अश्विनी में हो और शुक्र भी अच्छी स्थिति में हो।

Classically compatible

Classically difficult

Compatibility hints follow standard ashtakoot (yoni, gana, nadi, dina). For a full match score, use the kundali matching tool.

Health themes

स्वास्थ्य विषय: सिर की चोटें, आँखों एवं दृष्टि का तनाव, घुटनों की दुर्घटनाएँ, स्नायुतंत्र की अति-उत्तेजना, और बार-बार आने वाले बुखार। अश्विनी जातक शीघ्र स्वस्थ होते हैं किंतु शीघ्र चोटिल भी होते हैं। शरीर का अधिपत्य सिर और मुख के ऊपरी भाग पर है। केतु महादशा के दौरान या जन्म के अश्विनी चन्द्र पर गोचर के समय मोटरसाइकिल और तेज गति वाले खेलों में सावधानी आवश्यक है।

Spiritual orientation

आध्यात्मिक रूप से, केतु का स्वामित्व तथा मोक्षकारक देवद्वय अश्विनी को अचानक अंतर्दृष्टि, हस्त-स्पर्श चिकित्सा, और चिकित्सीय वृत्ति को नौकरी की बजाय बुलावे के रूप में अपनाने की ओर झुकाता है। बहुत से आयुर्वेदिक वैद्यों और शल्य चिकित्सकों की कुंडली में अश्विनी का बल मिलता है।

Classical sources

बीपीएचएस अश्विनी को प्रथम नक्षत्र के रूप में सूचीबद्ध करती है तथा केतु को इसका दशा स्वामी नियुक्त करती है। फलदीपिका की नक्षत्र टीका अश्विनी की चिकित्सा अधिकारिता पर बल देती है। बृहत् संहिता अश्विनी कुमारों को चन्द्र राशिचक्र के उद्घाटक के रूप में स्थापित करती है।

The dasha lord केतु starts every अश्विनी native's Vimshottari sequence. Read the केतु Mahadasha effects page for what this Mahadasha brings.

Frequently asked questions about अश्विनी Nakshatra

अश्विनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?+

विंशोत्तरी दशा प्रणाली में केतु अश्विनी का स्वामी है। चन्द्र देवद्वय (अश्विनी कुमार) इसके अधिष्ठाता हैं; केतु इसका कालस्वामी है।

क्या अश्विनी नक्षत्र विवाह के लिए शुभ है?+

अश्विनी जातक प्रायः जल्दी विवाह करते हैं। अश्व-योनि के पूरक नक्षत्रों (शतभिषा शास्त्रीय जोड़ीदार है) तथा अन्य देव-गण नक्षत्रों के साथ संगति श्रेष्ठ है। मानक अष्टकूट गणना केवल नक्षत्र से अधिक महत्वपूर्ण है।

अश्विनी जातक के लिए कौन सा करियर अनुकूल है?+

चिकित्सा (विशेषकर आपातकालीन चिकित्सा और आयुर्वेद), शल्य चिकित्सा, खेलकूद, विमानन, सेना, मोटर वाहन व्यवसाय, तथा प्रत्येक वह भूमिका जहाँ शीघ्र निर्णय लेना ही उत्पाद हो।

अश्विनी नक्षत्र का प्रतीक क्या है?+

घोड़े का सिर, जो अश्विनी कुमारों के रथ की गति, सहनशक्ति और अग्रणी ऊर्जा को प्रकट करता है।

अश्विनी की महादशा कब आती है?+

अश्विनी जातक का जीवन केतु महादशा (अश्विनी का स्वामी ग्रह) से आरंभ होता है। केतु की अवधि 7 वर्ष की होती है, जिसके बाद शुक्र महादशा आरंभ होती है।

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